“गंगा नदी” भारत के लिए जीवनदायिनी!

गंगा नदी जिसे भारत में मां के रूप में पूजा जाता है। गंगा नदी का एक स्नान कहते हैं, जिंदगी सवार देती है। शारीरिक कष्ट तक मिटा देते हैं। गंगा नदी का जल इतना पवित्र, पावन और पौष्टिक है, कि मन का गंदगी तथा शारीरिक गंदगी दोनों को धूल देती हैं। हिमालय में मौजूद गंगोत्री से निकलकर समुंदर में समाहित होने तक गंगा पूरे भारतवर्ष में ना जाने कितने जीव को जीवन प्रदान करते हैं। यू कहे तो गंगा भारत की शान के रूप में मानी जाती है।

गंगा नदी की महत्व सिर्फ हिंदू धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि गंगा को भारत में जीवनदायिनी के रूप में भी देखा जाता है। गंगा गंगोत्री से निकलकर लगभग 2525 किलोमीटर का सफर के बाद समुद्र में समाहित हो जाती है। गंगा की गहराई औसतन 16 मीटर है, लेकिन कहीं-कहीं गंगा नदी 30 मीटर से ज्यादा गहरी मिलती है। गंगा की सफर में गंगा में बहुत सी नदियां समाहित होती हैं। उनमें से मुख्य है गोमती, रामगंगा, घाघरा, गंडक, कोसी, महानंदा, यमुना और पुनपुन। भारत की इकोनामी में गंगा एक अहम योगदान देती है। लगभग 386000 वर्ग मील भूमि को उपजाऊ बनाने का श्रेय गंगा नदी को ही जाता है।

गंगा नदी के तट पर पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा लोग रहते हैं। गंगा नदी ना सिर्फ इंसानों को ही जीवन प्रदान करती है। बल्कि लाखों जानवरों ,पक्षियों तथा मछलियों की घर है। गंगा नदी अल्पाइन जंगल जोकि गोमुख के समीप है।

वहां से मैदानी भाग तक भिन्न-भिन्न इकोसिस्टम को मदद करती है। गंगा नदी पूरे दुनिया में खास तौर पर भारत की सबसे बड़ी तीर्थ यात्रा दर्शन के लिए जानी जाती है। चाहे वह ऋषिकेश हो या हरिद्वार, वाराणसी हो या प्रयागराज या फिर कोलकाता।

पूरे दुनिया की सबसे बड़ी डेल्टा गंगा नदी के अंत में बनती है। जिसे सुंदरवन के नाम से जाना जाता है। जिसे 1997 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित कर दिया गया है। यह करीब 105000 किलोमीटर से भी ज्यादा भूमि में स्थित है।

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