अगर कोई कैलाश पर्वत पर नहीं जा सकता तो हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? जानिए वजह

कैलाश पर्वत के रास्ते में हेलीकॉप्टर आपको मानसरोवर ले जा सकते हैं, लेकिन अद्भुत और रहस्यमयी कैलाश पर्वत की चोटी पर नहीं।

कैलाश पर्वत को स्वयंभू पर्वत के नाम से जाना जाता है और इसे ‘ओम पर्वत’ के नाम से भी जाना जाता है।

भक्तों द्वारा विभिन्न रूपों और नामों में पूजनीय इस पर्वत को ‘अजय पर्वत’ के नाम से भी जाना जाता है। इसे ‘अजेय’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कोई भी इस पर्वत की चोटी तक नहीं पहुंच पाया है।

कैलाश पर्वत को आकाश और पृथ्वी सहित दसों दिशाओं का मिलन स्थल कहा जाता है।

एक अन्य कारण मानसरोवर की यात्रा करना है, जो दुनिया की सबसे शुद्ध झीलों में से एक है। हिंदू धर्म में इस स्थान का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस स्थान पर सिख धर्म के गुरु गुरु नानक ने भी तपस्या की थी।

(फोटो साभार:- गूगल बाबा)

कैलाश पर्वत कश्मीर से भूटान तक फैला हुआ है। यदि आप हवा का उपयोग करते हैं, तो आप हवाई जहाज से और फिर सड़क मार्ग से काठमांडू पहुंच सकते हैं।

कैलाश की यात्रा के लिए हेलीकाप्टरों का उपयोग किया जा सकता है, जिसके लिए काठमांडू से नेपालगंज – सिमीकोट की यात्रा करनी पड़ती है। लेकिन यह यात्रा मानसरोवर तक ही की जा सकती है। मानसरोवर पहुंचने के लिए लैंड क्रूजर, लैंड रोवर, थार आदि जैसे मजबूत वाहन होने चाहिए।

मानसरोवर केवल हेलीकॉप्टर से ही पहुंचा जा सकता है। पहाड़ की चोटी पर आज तक कोई नहीं पहुंचा है। कोई हेलीकॉप्टर नहीं है।

हेलीकॉप्टर के नियंत्रण खोने और हेलीकॉप्टर के शिखर पर पहुंचने के बाद हेलीकॉप्टर के डायवर्ट होने की खबरें आई हैं। साथ ही इतनी ऊंचाई पर जाने के बाद ऑक्सीजन की कमी के कारण सिरदर्द और सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए हेलीकॉप्टर आपको ऊपर नहीं ले जाते।

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