Look Back 2020: लोक डाउन के दौरान साफ हुआ गंगा जी का पानी

कोरोना यानी कोवीड- 19, महामारी के कारण जो समस्त दुनियां में संकट आया वहीं ये कहर बरपाता वायरस कुछ सुखद एहसास भी लेकर आया है। केंद्रीय पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के वास्तविक समय के निगरानी आंकड़ों के अनुसार गंगा नदी के विभिन्न बिंदुओं पर स्थित 36 निगरानी इकाइयों में करीब 27 बिंदुओं पर पानी की गुणवत्ता नहाने और वन्यजीव तथा मत्स्य पालन के अनुकूल पाई गई है। जो पहले मात्र तीन या चार बिदुओं के अनुकूल थी। इसी तरह यमुना का पानी काफी हद तक साफ हो गया है ।

पहले यमुना के पानी को गंदे नाले की पानी की तरह देखने वाले इतनी स्वच्छ यमुना देखकर हैरान है। लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके भी विभिन्न सरकारें न कर पाई वो एक को रो ना वायरस ने एक महीने के अंतराल में करके दिखा दिया। गंगा और यमुना में साफ पानी, दिल्ली में तारों भरा आसमान और जालंधर से हिमाचल के पहाड़ियां का दिखाई देना वास्तव में किसी अच्ंभे से कम नहीं।

दो दशकों के भीतर पैदा हुई एक पीढ़ी के लिए तो यह परिवर्तन सातवें अजूबे की तरह है। नहीं तो प्रदूषण रहित भारत किसी कवि की कल्पना और किताबों में लिखे हुए किस्से ,कहानियों तक ही सिमट कर रह गया था। को रो ना ने भले ही मानव जाति के समक्ष एक संकट खड़ा किया है पर मानव पहले से ही स्पेन फ्लू ,प्लेग , स्वाईन फ्लू जैसे अनगिनत संकटों से भली भांति निपटता आया है

और जल्दी ही इस खतरे पर भी काबू पा लेगा,पर खतरे के बीच छुपी प्रदूषण मुक्त संसार की आशा रूपी किरण जो इस कोरोना वायरस ने दिखाई है अगर आज हम उसको हमेशा बनाए रखने के प्रति गंभीर हो गए तो हम आपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतरीन धरा छोड़ जायेंगे।

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