MS Dhoni ने स्वीकारा, मैं दबाव महसूस करता हूं और डरता भी हूं जानिए क्यों

MS Dhoni को विषम परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने की वजह से महान खिलाड़ियों में शामिल किया जाता है लेकिन इस पूर्व भारतीय कप्तान को यह स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं है कि उन पर भी दबाव और डर का असर होता है। खेलों में शीर्ष प्रदर्शन हासिल करने के लिए मानसिक अनुकूलन कार्यक्रम की मिसाल पेश कर रहे एमफोर (MFORE) को सपोर्ट करते हुए

MS Dhoni ने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर अपने विचार प्रकट किए। MS Dhoni ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत में अब भी यह स्वीकार करना बड़ा मुद्दा है कि मानसिक पहलू को लेकर कोई कमजोरी है, आमतौर पर हम इसे मानसिक बीमारी कहते हैं। महेंद्रसिंह धोनी ने विभिन्न खेलों के कोचेस से बातचीत के दौरान यह कमेंट किया।

पिछले साल जुलाई में विश्व कप सेमीफाइनल में भारत की हार के बाद से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर धोनी ने कहा कि कोई भी असल में यह नहीं कहता कि जब मैं बल्लेबाजी के लिए जाता हूं तो पहली पांच से 10 गेंद तक मेरे दिल की धड़कन बढ़ी होती हैं। मैं दबाव महसूस करता हूं। मैं थोड़ा डरा हुआ भी होता हूं, क्योंकि सभी इसी तरह महसूस करते हैं।

उन्होंने कहा कि यह छोटी सी समस्या है, लेकिन काफी बार हम कोच को यह बताने में हिचकते हैं। इसी वजह से कि किसी भी खेल में कोच और खिलाड़ी का रिश्ता काफी महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा- मेंटल कंडिशनिंग कोच की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। हालांकि यह कोच ऐसा व्यक्ति नहीं होना चाहिए

जो सिर्फ 15 दिन के लिए आता हो। ऐसे में वह सिर्फ अपना अनुभव ही साझा कर सकेगा। यदि मेंटल कंडिशनिंग कोच लगातार खिलाड़ियों के साथ रहेगा तो उसे पता चलेगा कि कौन से क्षेत्र हैं जो खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रहे हैं।

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