VPN का उपयोग अगर गैरकानूनी है, तो फिर VPN सॉफ्टवेयर का वजूद ही क्यों है?

VPN ज्यादातर दुनिया में बिल्कुल भी गैरकानूनी नहीं है बल्कि यह आपकी ऑनलाइन सुरक्षा के लिए वांछित माना जाता है। इसका सीधा संबंध आपके IP Address से होता है. नार्थ कोरिया और ईराक़ जैसे कुछ अजीबोगरीब देश ही इसे बैन रखे हैं। जब तक भारत में तानाशाही नहीं आ जाती तब तक VPN बैन की गुंजाईश नहीं है।

दरअसल वेबसाइट आपको ट्रैक करते ही हैं क्यूँकि उनका सारा व्यापार विग्यापन से चलता है. इसमें अच्छे साइट्स आपका डाटा और जानकारी ना चुराएं पर आप नहीं जान सकते कौन कितना अच्छा और कितना बुरा है. हालांकि सुरक्षा के लिए SSL सर्टिफिकेट जारी होते हैं, जो कि अलग विषय है, पर वे भी कोई पूर्ण विश्वस्त नहीं होते.

कोई भी विग्यापन एजेंसी आपके बारे में जाने बिना और उसे अपने डाटाबेस में नोट किए बिना आपको वहाँ से गुजरने दे इसकी संभावना केवल 1% से कम है. वह 1% भी उन संस्थाओं ने प्रदान कर रखा है जो इंटरनेट में उपयोगकर्ता के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहीं हैं.

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