क्यों सचिन को खेलते नहीं देखना चाहती थी उनकी मां रजनीताई…

कोई खेल बड़ा तब बनता है, जब खिलाड़ी महान हो, ऐसे हीं खिलाड़ी हैं सचिन रमेश तेंदुलकर जिन्होंने क्रिकेट को एक अलग मुकाम दिया। मैदान में बेहद शांत दिखने वाले सचिन बचपन में बेहद शरारती और नटखट थे। किसी के बचपन के बारे में अगर कुछ जानना हो तो मां से बेहतर इसे और कौन बता सकता है?

सचिन की मां रजनीताई जोकि एलआईसी में कार्यरत थी, कहती हैं कि सचिन आम बच्चों की तरह हीं बेहद शरारती था। दिनभर क्रिकेट खेलना और पेड़ों पर चढ़ना सचिन की दिनचर्या थी। लेकिन उनकी मां को यह अंदाजा बिल्कुल नहीं था कि वो एक दिन क्रिकेट में इतना बड़ा नाम करेगा। 24 अप्रैल को सचिन अपना 47वां जन्मदिन मना रहें हैं ऐसे में जानते हैं सचिन की यादें जो उनकी मां से जुड़ी है…..

सचिन जब दूसरी कक्षा में थे, तो उन्होंने अपनी क्लासमेट शेफाली को इसलिए पीट दिया था, क्योंकि उसने सचिन की मां पर कॉमेंट किए थे।

एक दिन सचिन पेड़ पर चढ़ कर आम तोड़ रहे थे, तो माली ने देख लिया। उसके चिल्लाने पर बाकी बच्चे तो भाग गए। लेकिन सचिन पेड़ पर हीं फंसे रह गए, तब सजा के तौर पर उनके भाई अजित ने उन्हें क्रिकेट एकेडमी भेजा। हालांकि मां को नहीं लगता था कि सचिन में कोई टैलेंट है, क्योंकि उनका मानना था कि ज्यादतर बच्चे बचपन में क्रिकेट बैट से और बच्चियां गुड़ियों से खेलती है।

सचिन ने 200 टेस्ट और 400 वनडे मैच खेले हैं, लेकिन उन्हें मैदान पर खेलते हुए उनकी मां ने केवल एक बार देखा है। वो भी सचिन के बार-बार कहने पर सचिन के 200वें टेस्ट मैच जोकि उनके करियर का आखिरी टेस्ट मैच था। इसके पीछे भी एक दिलचस्प कारण है दरअसल सचिन की मां उन्हें मैदान पर खेलते इसलिए नहीं देखना चाहती थी कि कहीं सचिन खेलते हुए चोटिल न हो जाए।

एक किस्से के बारे में उनकी मां ने बताया कि जब सचिन ने अपने क्रिकेट जीवन की शुरुआत की थी, तो अपने चौथे टेस्ट मैच में पाकिस्तान के खिलाफ वकार युनिस की गेंद पर उनके नाक में चोट लगी थी। ये किस्सा क्रिकेट गलियारों में आम है। उस चोट से सचिन की मां रजनीताई बेहद डर गई थी, लेकिन साथी खिलाड़ियों ने समझाया कि चोट मामूली है।

एलआईसी में कार्यरत उनकी मां के साथी कर्मचारी उनकी मां से हमेशा आग्रह करते थे कि वो सचिन को ऑफिस में बुलाएं। आखिरकार जब उनकी मां का ऑफिस का आखिरी दिन था तो सचिन अपने पूरे परिवार के साथ सांताक्रुज स्थित एलआईसी ऑफिस पहुंचे थे। हालांकि यह मुलाकात गुप्त रुप से रखी गई थी, लेकिन एलआईसी के क्षेत्रिय कार्यलय से भी लोग सचिन को देखने पहुंच गए थे।

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